## रोटी
### A Slice of Life called Bread
#Poetry
![[Pub-bread.webp]]
ये मेरी पहली कविता थी। तब मैं दसवीं में पढ़ता था, एक बार अपने शो DNA में बुंदेलखंड के किसानो की भूख पर ख़बरों की सीरीज़ करते हुए इस कविता की बहुत याद आई, फिर इसे अपनी पुरानी डायरी से निकालकर शेयर किया।
मन माने या ना माने
सब कुछ करा लेती है ये रोटी
ताक़त नहीं बनती
कमज़ोरी बन जाती है ये रोटी
क्या नहीं करते लोग इसके लिए
संघर्ष, मेहनत, सबकुछ...
पर न मिले तो नाक रगड़वा लेती है रोटी
**हर ज़िंदगी में ख़ास जगह बना लेती है रोटी**
##### Context Note
Written in tenth grade, pulled from an old diary years later during a reporting assignment on hunger. Some poems wait for the right famine to be heard.
1996 ~ 2015