## Ants
### चींटियाँ
#Poetry
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कोई सड़क पर जानवरों को देखकर चकित है... कोई सड़कों के ख़ालीपन को देखकर ये सोच रहा है कि ऐसी सुनसान, सुन्न सड़कें तो उसके मन में रहती थीं... बाहर कैसे आ गईं? बहुत से लोग उस भीड़ को देखकर भी चकित हैं जो सड़क पर चींटिंयों की तरह चली जा रही है... वायरस से डरे बग़ैर...
उस चलते फिरते आदमी के अंदर
भूख की अंगीठी है
सबने अपनी अपनी रोटी सेंकी उस पर
सब खा-पीकर घर चले गये
अब वो अकेला है सड़क पर
किसी लाल बत्ती की तरह
सबको रोक रोक कर कह रहा है
**"वायरस
उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता"**
##### Context Note
March 2020. Empty roads, a walking man, and hunger that outburns any virus. Written during the first lockdown when migrant workers became the only traffic on Indian highways.
2020-03-28