## Blind Grip
### धृतराष्ट्र की चूर-चूर पकड़
#Poetry
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उसकी आंख पर पट्टी बंधी थी
इसलिए वो हर चीज़ को
कसकर पकड़ने की कोशिश करता
सीढ़ी पर चढ़ता
तो हर पग पर सहारा ढूँढता
और जो सहारा मिलता
उसे मसल देने की हद तक पकड़ता
वैसे पकड़ तो अभावों में पले आदमी की भी तेज़ होती है…
इतनी तेज़.. कि जिन चीज़ों को पकड़ता है..
वो चूर-चूर हो जाती हैं
कुछ हासिल करने के भी घाव होते हैं
हथेलियों पर से पकड़ के वो निशान नहीं जाते।
वैसे तो कुछ भी छोड़ना
किसी के लिए भी मुश्किल है
लेकिन कुछ भी छूटता तभी है
जब अभाव का एहसास हार जाता है
जब आंखों पर बंधी पट्टी खुल जाती है
##### Context Note
Some grip the world because they cannot see it. Others grip it because they were never given enough to trust. The marks on the palm look the same.