## Cold Facts : बुद्धिजीवी बनाने वाले आंकड़े
#Poetry
मैं उस समाज का हिस्सा हूं
जो आंकड़ों पर लगे खून को
नल के नीचे लगाकर धो देता है
इसके बाद आंकड़े देखने से आंख नहीं जलती
ज़ुबान पर भी नहीं चुभते ये आंकड़े
बस फिसलते जाते हैं बातों में
ये आंकड़े ऐतिहासिक हैं
क्योंकि इन्होंने एक बुद्धिजीवी समाज की रचना की है
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आंकड़े पेश करने का चलन, तर्क के साधन के रूप में शुरू हुआ होगा। और तर्क एक तरह की वैक्स पॉलिश है जिससे विचारों को चमकाने का काम किया जाता है। पूरी दुनिया में हज़ारों वर्षों से ये होता आया है। और समय समय पर आंकड़ों के लेप से चमकते हुए तमाम विचारों में, ख़ून का लाल रंग भी नज़र आ जाता है।
>चाणक्य ने एक बार कहा था – हो सकता है कि एक धनुर्धर का निशाना चूक जाए, लेकिन एक चालाक व्यक्ति द्वारा बनाई गई योजनाएं, गर्भ में पल रहे बच्चे को भी मार देती हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस \(कृत्रिम बौद्धिकता\) के इस युग में भी आंकड़े यही कर रहे हैं। दवाओं और राजव्यवस्थाओं की मारक क्षमता छुपाने से लेकर विज्ञान और डर के नये नये बाज़ार बनाने तक, आंकड़ों का सामाजिक महाप्रयोग चल रहा है। आंकड़ों की बैसाखी दुनिया भर के लोगों को थमा दी गई है। और ==जिसके हाथ में बैसाखी हो, वो नारे नहीं लगा सकता, आवाज़ नहीं उठा सकता, आंकड़ों पर लगा ख़ून साफ़ नहीं कर सकता।==
##### Context Note
Here, statistics lose their stain.
Once washed,
they stop burning the eye,
stop pricking the tongue.
Numbers become conversational.
Intellect built on sanitized figures
forgets the human residue beneath them.
2014
%%
I belong to a society
That washes the blood off statistics
Under the running tap of convenience.
Once cleaned, these numbers
Don’t sting the eyes anymore.
They don’t prick the tongue either,
They just slip effortlessly into conversations.
These statistics are historical,
For they have built
A society of intellectuals.
चलो दुनिया की फिक्र कर लें,
मोमबत्ती जला लें, थोड़ा ज़िक्र कर लें,
Prince Charming.. Global Warming..
भूख.. जनसंख्या.. महामारी.. बलात्कार
इस ठंडे दौर में..
एयर कंडिशनर की ठंडी हवा में
ये सारे आंकड़े बहुत दिलचस्प लगते हैं %%