## कटऑफ गिरेंगे, तो आम आदमी डॉक्टर पर भरोसा कैसे करेगा?
जब इंसानी व्यवस्थाएँ दबाव में होती हैं, वे मानक घटाती हैं।
जब मशीनें सीख रही होती हैं, तो वे मानक और सख़्त करती हैं।
जल्द ही डॉक्टर और AI के बीच
आम आदमी का भरोसा जीतने की रेस होने वाली है
क्योंकि कटऑफ सीधे मेडिकल शिक्षा के सिर पर गिरी है
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NEET-PG में सीटें भरने के लिए
कटऑफ को शून्य या नेगेटिव तक गिरा देना
कमज़ोर छात्रों को खराब स्कोर के बावजूद आगे बढ़ा देना
शिक्षा सुधार नहीं —शर्मनाक आत्मसमर्पण है।
अगर MBBS करने के बाद भी
छात्र न्यूनतम योग्यता पार नहीं कर पा रहे,
तो ये सिर्फ कठिन पेपर की कहानी नहीं है।
ये मेडिकल शिक्षा की पूरी चेन की विफलता है।
 
> नये नियम के हिसाब से अगर कोई मेडिकल का ग्रैजुएट परीक्षा में
> कुछ न लिखकर भी लौट आए, तो भी वो सेलेक्ट हो जाएगा
> NBEMS के 13 जनवरी 2026 के आधिकारिक नोटिस के अनुसार
> NEET-PG 2025 में qualifying percentile को अभूतपूर्व रूप से घटाया गया
> General/EWS के लिए 50 से 7 percentile तक
> और SC/ST/OBC के लिए 40 से सीधे 0 percentile तक।
> ये सब खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए किया गया है
 
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यह बहस डॉक्टरों की संख्या पूरी करने की नहीं है,
यह सवाल उस भरोसे का है
जिसके आधार पर मरीज़ अपना जीवन डॉक्टर के हाथ में सौंपता है।
इस दौर में दुनिया बदलाव के एक्सप्रेस-वे पर भाग रही है।
AI ऑपरेशन थिएटर में घुस चुका है।
AI-assisted diagnosis, robotic surgery
और autonomous medical systems तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
इलॉन मस्क कह रहे हैं...
[कुछ सालों में रोबोटिक सर्जरी AI खुद करेगा।](https://www.the-independent.com/tech/elon-musk-ai-optimus-surgeons-b2897000.html?referrer=grok.com)
और AI के साथ ना आरक्षण का चक्कर है,
ना grace marks, ना compromise
तकनीक कह रही है — error margin कम होना चाहिए।
हमारी व्यवस्था कह रही है — सबके लिए cutoff कम कर दो।
यानी इंसानी व्यवस्था मानक गिरा रही है,
दूसरी तरफ मशीनें परफेक्शन की ओर दौड़ रही हैं
यह शिक्षा सुधार की बहस नहीं,
बल्कि patient safety और healthcare credibility की बहस है।
आज हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तो कल मशीन तो हस्तक्षेप कर ही देगी
2026-01-15