## सरोवर
### Depth of Sorrows
#Poetry
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दुखों को मैं छोड़ूँगा नहीं...
उन्हें काम पर लगाऊँगा...
पत्थर तुड़वाऊँगा, पिंजरे कटवाऊँगा
नया रास्ता बनवाऊँगा
इस तरह दुखों को मैं मज़दूर बनाऊँगा...
वो दिन रात मेहनत करेंगे,
मुझे छीलेंगे, काटेंगे, अंदर तक उधेड़कर रख देंगे
और फिर किसी बरसात में बन जाएगा सरोवर
सुख से बैठना तुम मेरे साथ... किनारे पर....
हम देर तक गहरी बातें करेंगे
**दुख की हर गहराई में सुख का विस्तार है**
##### Context Note
This poem does not abandon sorrow; it puts sorrow to work.
Stones break, cages are cut, the inner ground is torn open, and slowly the same grief becomes a lake. Where there was once a wound, one day two people may sit in peace and speak deeply.
2024-06-11
%% इसलिए दुख मुझे प्रिय हैं
दुख वो मज़दूर है गहरी खुदाई करता है
जो सुख लेकर आता है
दुख जितना गहरा, सुख के लिए अंदर %%