## फ़ासला
#Poetry
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मेरे अंदर खड़ी
संकोच की दीवार को गिराने के लिए
कुछ करना होगा
वर्ना तुम्हें
बुत बनना होगा
हम दोनों
एक देवालय की दो दीवारों पर
अलग अलग स्थापित हो जाएँगे
सिंदूर में नहाए
एक दूसरे को देखते
मंत्रों को सोखते
मैं और तुम
और हमारे बीच से गुज़रता
इंसानों का महासमुद्र
यूँ अनंत काल तक
एक दूसरे को देखते रहना
एक कभी न ख़त्म होने वाली पूजा है
##### Context Note
Two figures on opposite walls of one temple. The ocean of humans between them never stops moving. The gaze never stops either. Sometimes distance is equivalent to worship.
2016-04-03