## सपने में तैरती सत्य की लाश #Poetry ![[pub-floating-truth.webp]] कोई सपना अपना सा टूट जाए तो आज की सच्चाई को आँखें खोलकर डुबो दूँ एक एक सांस को तरसता वो सच मेरा-तुम्हारा थोड़ी छटपटाहट के बाद किसी मुर्दे की तरह सपने की सतह पर तैरने लगेगा न कोई शुरुआत, न कोई अंत सपने में घुलने लगेगा सत्य का मृत शरीर और दोनों बहने लगेंगे एक साथ क्या सपना कभी सच से आज़ाद हो सकता है ?   ##### Context Note When a dream breaks, truth gets drowned with open eyes. It floats on the surface of sleep like a corpse - and the two begin flowing together, inseparable. 2015-08-31