## Ganges Walk
#Poetry
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कोई नहीं था…
बस एक आवाज़... जिससे बात करते करते
पता ही नहीं चला,
कब कीचड़ पीछे छूट गया,
कब गंगा का किनारा आ गया
वहां उतरा तो ज़मीन वही थी
पर मेरा होना कितना हल्का था
नहीं जान पाते हम
कि संवाद
कब खींचकर निकाल लेता है
हमें पाप-मध्य से
और आसानी से खोल देता है
वो गांठ
जिसे हमने चुप्पी से बांधकर रखा था।
##### Context Note
Some conversations move the way rivers do. The mud stays back, the ground feels lighter underfoot, and a knot you didn't know you were holding quietly comes undone.
2013-06-27