## हार्दिक दुख
#NotesOnNews
एक सपने पर लापरवाही का खंभा गिर गया
हार्दिक फिर कभी नहीं उठा
हार्दिक को आप नहीं जानते होंगे..
उससे आपका परिचय सिर्फ आज होगा..
शायद एक ही दिन के लिए.... क्योंकि आज वो खबरों में है
10वीं में पढ़ने वाला नेशनल लेवल बास्केटबॉल खिलाड़ी
मेडल जीतने की तैयारी कर रहा था
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[Instagram Reel on this](https://www.instagram.com/reel/DRhYWAaj5nJ/?igsh=bjk5aDV6d2V3NzNt)
हार्दिक राठी का परिवार और उसका गांव…उसे खेलता देखकर सोचते थे जैसे वो खुद खेल रहे हों
उसकी मेडल वाली संभावनाओं को सबने अपनी युवा अवस्था के धूल खाए सपनों से जोड़ लिया था...
हार्दिक की प्रैक्टिस दूर से चमकती थी..
लेकिन बास्केटबॉल कोर्ट का पोल ज़ंग लगा था
कम से कम 10 बार शिकायत की गई थी.. लेकिन मेंटेनेंस ज़ीरो...
चार साल पहले 11 लाख रुपये दिए गए थे मेंटेनेंस के लिए…
लेकिन फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ.. विभाग ने मेंटेनेंस को इग्नोर किया
बजट बार बार रोका गया.. जिसकी जवाबदेही ज़ीरो रही...
बास्केटबॉल कोर्ट के पोल के लिए दुनिया भर में स्टैंडर्ड है
7-गेज का मोटा स्टील,
6×6 इंच स्क्वेयर पोल,
5 फीट गहरी कंक्रीट वाली नींव
लेकिन हमारे यहां अक्सर 12-13 गेज का पतला लोहा
ऊपर-ऊपर से फिट कर दिया जाता है।
जो 90 किलो के खिलाड़ी का झटका भी नहीं सह पाता।
और अगर ज़ंग लगी हो और मेंटेनेंस ना हो तो ये पोल खेल खेल में जान ले लेते हैं।
अगर पूरा सिस्टम लापरवाही कर रहा हो तो उसका बोझ बहुत ज़्यादा होता है
करीब 750 किलो का बास्केटबॉल पोल सीधे इस बच्चे के सीने पर गिरा
जिसमें एक दिल था.. उस दिल में एक अरमान था जो चकनाचूर हो गया
और ऐसा होने में उसकी कोई गलती नहीं थी...
इस हत्या के बाद पुष्टि हुई है... कि इसके पीछे
एक सिस्टम था जिसमें सिर से पांव तक सख्त सीमेंट भरा हुआ था
जिसकी कोई आंख नहीं थी.. जिसका कोई दिल या दिमाग नहीं था... जिसका कोई चेहरा नहीं था
मेरे लिए.. आपके लिए.. हम सबके लिए..
ये… 'हार्दिक दुख'.. का विषय है
2025-11-26