## हिंदी पुस्तक मेलों का जंतर मंतर युग #CCTV ![[Pub-jantar-mantar-book-fairs.webp]] हिंदी के किसी भी पुस्तक मेले और जंतर मंतर के विरोध प्रदर्शनों में बहुत सी समानताएँ हैं। चेहरे, बातें, इरादे, मार्केटिंग… एक जैसे ही लगेंगे आपको। लेकिन सबसे बड़ी समानता ये है कि 99% बार दोनों ही जगहों पर सिर्फ़ वैचारिक चूड़ियाँ ही तोड़ी जा रही होती हैं। हिंदी लेखन की दुनिया में ये दौर जंतर मंतर युग कहा जाएगा। कोई नहीं जानता कि ये किताबें कहाँ जाती हैं, कौन पढ़ रहा है इन्हें, समाज की मुख्यधारा में ये किताबें किस तरह और किस मोड़ पर मिल रही हैं? ये देखना होगा। कभी कभी ऐसा लगता है कि इस मीडियम को भी एक क्रांतिकारी छलाँग की ज़रूरत है, जैसा कि हमने technology की दुनिया में पिछले कुछ वर्षों में देखा है।   ##### Context Note Two crowded squares in the same city, mistaken for movements. Hindi book fairs and Jantar Mantar protests share crowds, faces, and a quiet futility. The piece asks where the books actually go, and who is left reading. 2015-02-21