## Jealousy : मन में भी श्मशान होता है
#Poetry
कई बार चिठ्ठियां त्वचा में छेद कर देती हैं
और मन के अंदर बहने वाले द्रव बाहर निकलने लगते हैं
वैसे आजकल चिठ्ठियों का नहीं फेसबुक का ज़माना है
लोग चिठ्ठियां काग़ज़ पर नहीं लिखते
कहानियां, संस्मरण, तस्वीरें, चिपचिपी बातें
चमचागीरी, अभिमान की मालिश, यारियां, दुश्वारियां
सब कुछ सोशल नेटवर्क की हवा में लिखा जाता है
और इंसान की ये तमाम तहरीरें
करोड़ों लोगों द्वारा पढ़ी जाती हैं, हर रोज़
अपने अंदर लगे मकड़ी के जाले को साफ करने की
नाकाम कोशिश के साथ
सब किसी दूसरे को देख रहे हैं
किसी और के उत्सव को देखते और पढ़ते हुए
लोगों के अंदर का श्मशान सुलगने लगता है
##### Context Note
Jealousy is like a cemetery inside the mind. These days we do not write letters on paper; we write everything in the air of the social network, where millions read it every day. While we keep watching someone else's celebration, the graveyard inside us slowly starts to burn.
2016-09-25