## Jewel & Thorns ### ज़ेवर और काँटे #Poetry ![[Pub-Jewel-and-Thorns.webp]] ### Jewel : ज़ेवर वायरस की तस्वीर को देखिए ज़ूम करके किसी माइक्रोस्कोप में बिलकुल ज़ेवर की तरह लगता है ग़रीबी-भुखमरी को ज़ूम करके देखिए उसमें स्पष्ट दिखते हैं बड़े बड़े लोग ज़ेवर सोने के... चाँदी के... प्रतिष्ठा के लगते हैं वायरस की तरह...   --- ### Thorns : काँटे अपनी तर्जनी उँगली सामने वाले पर उठा दो इतनी बार उठा दो कि किला बन जाए और फिर रचो कोई खेल बिना ये देखे कि ये उँगलियाँ तुम्हारे व्यक्तित्व से काँटे की तरह निकली हुई है उस अजेय वायरस में भी ऐसे ही काँटे देखे हैं मैंने   ##### Context Note Two pandemic-era poems written in May 2020. The virus under a microscope looks like jewellery. The fingers we raise to accuse have the same spikes. Look long enough, and the microscope becomes a mirror. 2020-05-24