## Khaansi Melody _खांसी वाला राग_ #Doorbeen आज अपनी उस कविता से आपको मिलवाना चाहता हूँ, जो मास्क पहनकर AQI वाला आलाप करने लगी और उसने खांसते खांसते एक गीत का रूप ले लिया ये कविता उस शहर में लिखी गई, जहाँ हवा के बारे में सोचो तो भी खांसी आती है। ये दिल्ली की हवा का सराउंड साउंड है जो खांसी वाले रोग से राग की तरह पैदा हुआ है और कह रहा है कि व्यवस्था बड़ी बीमार है यह दुखद है कि— Air Quality Index लगातार बढ़ रहा है और Political Quality Index लगातार घट रहा है ![[Pub-Khaansi-Melody-Cover-Art-Reel.webp|400]] पहले कविता पढ़िए फिर खांसी पर अब तक का सबसे सुरीला गाना सुनिए ### कविता जब आँख खुली तो वो एक ऐसे शहर में था जहाँ साँस नहीं आती थी जहाँ हवा माटी को ढोते-ढोते थककर हाँफने लगी थी जहाँ कोई गुनगुना नहीं सकता था कोई गा नहीं सकता था वो ऐसा शहर था जिसका अपना कोई गीत नहीं था कोई संगीत नहीं था कोई धुन नहीं थी प्रेम और क्रांति की साँस बार-बार फूल रही थी वहाँ लग रहे नारों पर काला कार्बन जम गया था ये शहर अब न दिखता है न सुनाई देता है यहाँ खांसी ही सबसे सच्ची आवाज़ है &nbsp; &nbsp; ### Khaansi Melody (Audio) _खांसी पर अब तक का सबसे सुरीला गाना_ <audio controls controlsList="nodownload" src="https://media.sidtree.net/audio/khaansi-melody-by-sidtree.mp3"></audio> **कफ-कफ दिल्ली… उफ़-उफ़ दिल्ली** **Text & Concept:** SidTree **Sound Composition:** SidTree **Year:** 2025 #### Lyrics > गले में खराश है, > शहर में विकास है > कफ-कफ दिल्ली… उफ़-उफ़ दिल्ली > ये AQI वाला आलाप है > > मास्क पहन के जीते हैं, > ये सांस नहीं, हिसाब है > कफ-कफ दिल्ली… उफ़-उफ़ दिल्ली > ये खांसी वाला राग है > > उसकी आँख खुली तो देखा— > शहर जाग रहा था, > पर हवा सो चुकी थी > > यहाँ गुनगुनाना > लक्ज़री की निशानी > यहाँ गाना > जोखिम भरी कहानी > > धुएँ की तह में > नारे अटके रहे > क्रांति पर जमा कार्बन > सारे भटके रहे > > यहाँ AQI बढ़ता है > ग्राफ़ की तरह, > और PQI गिरता है > नैतिकता की तरह > > डेटा रोज़ अपडेट होता है > पर हवा नहीं > यहाँ फ़ाइलों में सुधार है > फ़ेफड़ों में नहीं > > कफ-कफ दिल्ली… उफ़-उफ़ दिल्ली > ये खांसी वाला राग है > > क-ख… क-ख… > सा… रे… > सांस भी अब सुर मांगती है > शहर कैसा है जानती है *This work uses a synthetic voice as a narrative instrument.*