## Mahabharat Diary
### महाभारत के नन्हे-मुन्ने विश्लेषण
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महाभारत के नन्हे-मुन्ने विश्लेषण - नन्हे यानी आकार में छोटे, मुन्ने यानी बच्चे के भाव से सिखाने वाले। कुल मिलाकर इनमें नीति और व्यवहार से जुड़े सूत्र हैं।
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**1. समय का चक्र किसे कुचलता है?**
पहला दिन:
दुर्योधन अजेय था, अपनी शक्ति को निहार रहा था
18वाँ दिन:
दुर्योधन लाशों के साथ अकेला था, टूटी जाँघ लिए... शव गिन रहा था
सूत्र: समय का चक्र, अभिमानी और दिव्यास्त्रों से लैस योद्धा को भी कुचल देता है।
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**2. कोई भी मोह परिणाम के विषय में नहीं सोचता**
धृतराष्ट्र - पुत्र मोह
भीष्म - पिता का मोह
द्रोणाचार्य - नौकरी का मोह
दुर्योधन - संपत्ति का मोह
कुंती - सामाजिक प्रतिष्ठा का मोह (बेटे कर्ण को नदी में बहा दिया)
सुदेशणा (राजा विराट की पत्नी, कीचक की बहन) - भाई का मोह
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**3. क्रोध की सभ्यता और असभ्यता**
वनवास के दौरान युधिष्ठिर की अपराधबोध से मिश्रित शांति पर द्रौपदी ने कटाक्ष किया, उसे ढूँढ़ने और चाहने पर भी क्रोध नहीं मिल रहा था और वो बेचैन थी... इस पर युधिष्ठिर ने क्रोध के दायरों और चरित्र को परिभाषित किया -
क्रोध की भी अपनी मर्यादा होती है,
क्रोध किसी नेत्रहीन के हाथ से चलने वाला पत्थर नहीं है जिसकी दिशा नियुक्त नहीं होती।
**क्रोध को अनाड़ी के धनुष से निकला हुआ बाण नहीं होना चाहिए, उसे तो अर्जुन का बाण होना चाहिए, कि धनुष से निकले तो लक्ष्य को भेद दे।**
क्रोध को सभ्य होना चाहिए, व्यक्ति को अंधा कर देने वाला क्रोध न तो तलवार बन सकता है, और न ही ढाल।
2019-09-19