### नोएडा का वो आदमी जिसे डूबने दिया गया #NotesOnNews ![[Pub-nobody-saved-yuvraj.webp|400]] > **ये AI तस्वीर एक दृश्यात्मक आरोप है > कि साहस को लकवा मार गया है, > संवेदनाएँ सुन्न हो चुकी हैं। > इसमें जो डर है, जो चीख है > वो इस देश की हक़ीक़त है।** कार की छत पर बैठा एक आदमी। चारों तरफ पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF, भीड़ और फिर भी ... कोई नहीं 27 साल का युवराज मेहता। एक इंजीनियर कोई VIP नहीं कोई सिफ़ारिश नहीं बस एक बेटा, जो फोन पर कह रहा था, **“पापा, मुझे बचा लो”** ![[Pub-nobody-saved-yuvraj-2.webp|300]] ये हादसा नहीं है हादसा अचानक होता है। यहाँ हर मिनट गिना गया। युवराज पानी में डूब रहा था, और सिस्टम बाहर खड़ा जोखिम का हिसाब लगा रहा था। पानी ठंडा है या नहीं सरिया हो सकती है, चोट लग सकती है SOP क्या कहता है इस तरह हर गुज़रते सेकंड के साथ... एक इंसान कम होता जा रहा था। सबसे डरावनी बात ये है ... जिसे लोगों की जान बचाने की ट्रेनिंग दी गई थी, वो नहीं उतरा ! उनके पास वर्दी थी, ट्रेनिंग थी — साहस नहीं था। वहीं दूसरी तरफ जिसे रेस्क्यू के बारे में कुछ खास नहीं पता था वो डिलीवरी बॉय कूद गया... उसने रस्सी बांधी, पानी में उतरा और पूरा सिस्टम देखता रहा। हालांकि तब तक युवराज डूब चुका था अब सब जाग गए हैं अफ़सर हटाए गए हैं बैरिकेड लग रहे हैं लाइटें जल रही हैं फ़ाइलें चल रही हैं लेकिन सवाल वहीं अटका है ये सब पहले क्यों नहीं हुआ जब वो लड़का डूब रहा था, तब किसी ने उसे बचाने का जोखिम क्यों नहीं लिया ? नोएडा सेक्टर-150 को 'प्रीमियम' कहा जाता है वहाँ प्रॉपर्टी की क़ीमतें आसमान छूती हैं। लेकिन व्यवस्था का साहस किसी गड्ढे में डूबा हुआ मिलता है युवराज इसलिए मरा क्योंकि **सिस्टम ने उसे बचाने का रिस्क नहीं लिया।** और जिस देश में रिस्क इंसान से बड़ा हो जाए ... वहाँ अगली मौत बस अपनी बारी का इंतज़ार करती है। 2026-01-19