## एक दिन के लिए पहचान उतारकर देखो
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ज़रा सा वेश बदल जाए, तो दुनिया की नज़र बदल जाती है।
पराग शाह, मुंबई के घाटकोपर पूर्व से दो बार के विधायक हैं, रियल एस्टेट कारोबारी हैं, 3300 करोड़ रुपये की नेट वर्थ है उनकी... लेकिन भिखारी के वेश में उनके अपने दफ्तर के चौकीदार ने भीतर नहीं जाने दिया, 25 से 30 साल पुराने दोस्तों ने नहीं पहचाना। लेकिन इसी अनजान चेहरे को सड़क पर उन लोगों ने अपनाया, जिनसे उसका कोई परिचय नहीं था, किसी ने समोसा खिलाया, किसी ने बची हुई बासी रोटी खिला दी, किसी ने अपनी जेब से पैसे दिए। ये पूरा सोशल एक्सपेरिमेंट उन्होंने अपने जैन धर्मगुरु नम्रमुनि महाराज से प्रेरित होकर किया। बाकायदा मेकअप करवाया, वीडियो भी बनवाया। कई लोग इसमें पब्लिसिटी स्टंट देखेंगे लेकिन ऐसा करना इस घटना में छुपे विचार के संकुचित करना होगा
भारत की गुरु शिष्य परंपरा में गुरु का आदेश केवल मानने की चीज नहीं रहा, वो कई बार शिष्य के अहंकार, सामर्थ्य और समर्पण की सबसे कठिन परीक्षा बन जाता है। द्रोणाचार्य ने गुरु दक्षिणा में राजा द्रुपद को बंदी बनाकर लाने को कहा, तो पांडव उन्हें पकड़कर गुरु के सामने ले आए। एकलव्य से अंगूठा मांगा गया, तो उसने अंगूठा काटकर चरणों में रख दिया, हालांकि ये प्रसंग न्याय और भेदभाव के गंभीर सवाल भी छोड़ता है। महाभारत के आदिपर्व में ही आरुणि की कथा है, जो गुरु की आज्ञा पूरी करने के लिए खेत की टूटी मेड़ पर स्वयं लेट गए थे ताकि पानी का बहाव रुक सके।
पराग शाह के गुरु ने उनसे न अंगूठा मांगा , न युद्ध करने को कहा, उन्होंने केवल एक दिन के लिए उनकी पहचान उतरवा दी और ये होते ही पराग शाह ने वो जान लिया.. जो अनमोल है। बिना नाम और परिचय के किसी अनजान इंसान से मिली करुणा ही मनुष्यता की असली पूंजी है।
2026-09-15