## प्रश्न Poetry
### प्रश्नों को प्रक्षेपित करने वाली कविताएँ
#Poetry
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प्रश्नों का चरित्र भी अजीब होता है, वो तभी आते हैं जब आप थोड़ा धीमे हो जाते हैं, थोड़ा सा ठहर जाते हैं। इस दौर में ठहराव को मृत्यु के समान माना जाता है। ठहराव से हर कोई डरा-डरा सा लगता है और जीवन में हर वक़्त व्यस्त रहने को ही ईश्वर की कृपा माना जाता है.. इसका दूसरा पहलू ये भी है कि अगर ठहर गये तो प्रश्नों का सामना करना पड़ेगा।
लंबे अरसे के बाद, पिछले हफ़्ते मैंने छुट्टी ली और थोड़ा ठहरने और चुपचाप रहने का अनुष्ठान किया। घर पर रहा, बिना किसी काम या प्रयोजन के हर रोज़ दिल्ली के किसी अनजान या जाने पहचाने कोने की तरफ निकल जाता था। निरुद्देश्य घूमता था और कोई नई याद लिखता था। पुरानी दिल्ली की भीड़ में गुम होकर खाता पीता रहा। मेरे चारों तरफ हर कोई, किसी ना किसी उद्देश्य के साथ भाग रहा था। उन सबके बीच मैं सहज और सापेक्ष रूप से धीमे चल रहा था, बिना किसी आवेग के। इस धीमी रफ़्तार में हारने का बोध नहीं था। जब घर पहुँचता - तो देर रात तक पढ़ने का क्रम चलता था। ये पढ़ाई भी बिना किसी उद्देश्य वाली पढ़ाई थी, नया जानने और समझने के उत्साह से भरी हुई। ठंडी और गहरे काले रंग वाली रातों को पार करके अक्सर आसमान को हल्का गुलाबी करने वाले उषा काल तक, कविताएँ और लेख लिख रहा था। इन छुट्टियों में एक बार फिर ये लगा कि ठहराव, अगर प्रयास की हत्या ना करे, तो ये बुरी चीज़ नहीं है।
जिस तरह ISRO (Indian Space Research Organisation) एक साथ कई सैटेलाइट लॉन्च करता है, ठीक उसी तरह मैंने भी एक साथ कई प्रश्नवाचक कविताएँ प्रक्षेपित की हैं। ये सभी सफलतापूर्वक अपनी कक्षा यानी ऑर्बिट में स्थापित हो गई हैं। इनमें आपके आसपास का जीवन है, जीवन से जुड़े कुछ मूल प्रश्न हैं और इनके उत्तरों में संवेदनाएँ गुँथी हुई हैं। इनमें आपको फैले हुए ख़्वाब भी मिलेंगे और लोकतंत्र में इजाज़त माँगकर विरोध करने वाली पालतू भीड़ भी।
[[Dreams Hit The Ceiling]]
[[Resonance]]
[[Dry Days]]
[[Clocks are Locks]]
[[Relationships Die]]
[[Decoration]]
[[Bechari ya Bitch]]
[[Floating Truth]]
[[High Fever]]
[[Permission]]
2018-12-23