## RamGPT - Large 'Maryada' Model (LMM)
### मर्यादा, Artificial Intelligence और श्री राम
#Doorbeen
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अभी धरती पर इंसानों के मर्यादित होने का सवाल सुलझा भी नहीं था कि AI को मर्यादित बनाने को लेकर बहस होने लगी। कई कंपनियों के कर्ता-धर्ता चाहते हैं कि Artificial Intelligence की शक्ति पर नैतिकता और मर्यादा का अंकुश ज़रूरी है। Intelligence चाहिए... लेकिन अनैतिक न हो, मर्यादा न तोड़ता हो, गलत काम न करे।
सोचिए... इंसान कितना सावधान है मशीन की मर्यादा के प्रति।
सोचिए... मर्यादा कितनी कीमती है, आज भी।
बिना मर्यादा और नैतिकता के AI सेवक से भी हमें भय है... ऐसे में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का विज़न कितना कीमती है - जिसे हमारे देश में दिखावटी आदर्शों के कारावास में बंद कर दिया गया है। जबकि ChatGPT से भी ज़्यादा ज़रूरत RamGPT की है।
==श्री राम के आचरण और मर्यादा का संसार इतना विशाल है कि इसे एक Large Language Model (LLM) की तरह Large Maryada Model (LMM) माना जा सकता है। आदर्श शिष्य, आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श शासक, आदर्श कूटनीतिज्ञ - इन सबकी मर्यादाएं एक ही model में समाहित हैं। और इसे AI युग के अनुरूप एक शब्द में समेटें तो वो शब्द होगा - **RamGPT**==
श्री राम की छवि से तीर-कमान छीनकर दिनभर बाण चलाने वालों को अपना नज़रिया बदलना होगा और राम को मर्यादा के लेंस से देखना होगा।
राम एक आदर्श शिष्य हैं - वो पूरे जीवन ऋषि-मुनियों और बुज़ुर्गों से उनके अनुभवों को सोखते रहते हैं, उन्हें कभी Outdated नहीं मानते। आदर्श पुत्र हैं - मां-पिता के आदेश पर 14 वर्षों का वनवास स्वीकार कर लेते हैं। आदर्श भाई हैं - लक्ष्मण मूर्छित होते हैं तो संजीवनी आने तक उनके पास बैठे रहते हैं। आदर्श पति हैं - सीता के लिए लंका से टकरा जाते हैं। उन्हें वनवास का शोक नहीं.. और जब राज-पाट वापस मिलता है... तो किसी तरह का अहंकार नहीं। ये सब गुण अपनी जगह कीमती हैं, लेकिन राम का असली विज़न इनसे आगे है - उनकी शासन व्यवस्था में।
राम की शासन व्यवस्था को आदर्श माना जाता है। रामचरितमानस में तुलसीदास जी कहते हैं -
> राम राज बैठे त्रैलोका। हरषित भए गए सब सोका।।
> बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई।।
> दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।।
> अल्पमृत्यु नहिं कवनिउ पीरा। सब सुंदर सब बिरुज सरीरा।।
> नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना।।
> सब गुनग्य पंडित सब ग्यानी। सब कृतग्य नहिं कपट सयानी।।
> राम राज नभगेस सुनु सचराचर जग माहिं।
> काल कर्म सुभाव गुन कृत दुख काहुहि नाहिं।।
यानी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के शासन में सर्वत्र हर्ष व्याप्त हो गया, सारे भय-शोक दूर हो गए, दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिल गई। कोई अल्पमृत्यु नहीं, रोग-पीड़ा नहीं। सभी स्वस्थ, बुद्धिमान, ज्ञानी और कृतज्ञ।
>आज जब पूरी दुनिया AI Alignment और AI Safety पर बहस कर रही है - कि Intelligence कैसे ethical हो, कैसे मर्यादित हो - तो ये विज़न सिर्फ धार्मिक नहीं, एक governance model है।
वाल्मीकि रामायण में ऐसे ज़िक्र भी मिलते हैं कि राम राज्य में किसी को कोई ज़िम्मेदारी हमेशा के लिए नहीं सौंपी जाती। वहां स्थानांतरण का ज़िक्र मिलता है... यानी Transfers होते रहते थे और मान-दान की व्यवस्था थी। इसका मतलब ये है कि काम का सम्मान और धन का उचित भुगतान।
आज श्री राम के नाम पर राजनीति तो बहुत होती है, लेकिन कोई नेता राम के आचरण से कुछ नहीं सीखता। आज के दौर में सत्ता के लिए सभी मर्यादाएं दांव पर लगा दी जाती हैं। लेकिन श्रीराम को सत्ता का लोभ कभी नहीं रहा। किसी के राज्य पर कब्ज़ा करना या उसे हड़पना उनका उद्देश्य कभी नहीं रहा। वो चाहते तो लंका पर कब्ज़ा कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। रावण का वध करके लंका विभीषण को दी, किष्किंधा सुग्रीव को - सत्ता का नियंत्रण हमेशा स्थानीय नेताओं को दिया।
>शक्ति हो तो कब्ज़ा करो - ये आज की सोच है। राम की सोच इसके उलट थी - शक्ति हो तो बांटो। आज की AI कंपनियों को ये पाठ सबसे पहले सीखना चाहिए।
वैसे तो श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, लेकिन उनके बारे में ये भी कहा जाता है कि उन्होंने बालि को धोखे से मारा था। किष्किंधा के राजा बालि को ये वरदान प्राप्त था कि युद्ध के दौरान जो भी दुश्मन बालि के सामने आएगा, उसकी शक्ति आधी हो जाएगी। इसलिए राम ने बालि को छुपकर मारा था। इसके लिए कई बार कुछ विद्वान उनकी आलोचना भी करते हैं, लेकिन नोट करने वाली बात ये है कि श्री राम ने धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अपनी ये आलोचना भी स्वीकार कर ली। आज के दौर में इस गुण की बहुत कमी है।
>आज AI systems गलतियां करते हैं तो कंपनियां छुपाती हैं, बचाव करती हैं, शब्दों का खेल खेलती हैं। RamGPT का पहला नियम यही होगा - गलती हो तो स्वीकार करो, भले ही आलोचना सहनी पड़े।
श्रीराम को सौम्य, शालीन, धीर-गंभीर, वीर और त्यागी कहा जाता है। लेकिन जब ज़रूरत पड़ती है तो वो अपना क्रोध भी दिखाते हैं। लंका जाने के लिए समुद्र में मार्ग बनाने के लिए श्रीराम ने समुद्र से तीन दिनों तक विनती की और ये कहा कि उनकी सेना को समुद्र पार करने दिया जाए। लेकिन जब समुद्र नहीं माना तो राम ने शस्त्र उठाकर समुद्र को सुखाने की धमकी दी। और इसके बाद समुद्र डरकर मान गया। ये पूरा प्रसंग रामचरितमानस के सुंदरकांड में विस्तार से लिखा हुआ है।
> बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति
> बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति
> लछिमन बान सरासन आनू
> सोषौं बारिधि बिसिख कृसानू
> सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति
> सहज कृपन सन सुंदर नीति
> ममता रत सन ग्यान कहानी
> अति लोभी सन बिरति बखानी
> क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा
> ऊसर बीज बएँ फल जथा
यहां राम कहते हैं - मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक रूप से कंजूस व्यक्ति से सुंदर नीति, ममता में फँसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यंत लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शांति की बात और कामी व्यक्ति को भगवान की कथा सुनाने का वैसा ही फल मिलता है जैसा बंजर ज़मीन में बीज बोने से मिलता है।
>AI Regulation की बहस में भी यही सबक है। विनम्र Guidelines से काम नहीं चलता जब तक Enforcement न हो। राम ने तीन दिन विनती की, फिर शस्त्र उठाया - ये क्रम ज़रूरी है।
राम बहुत अच्छे Organiser भी थे। जब वनवास पर गए तो सिर्फ तीन लोग थे - श्रीराम, सीता और लक्ष्मण। लेकिन जब सीता हरण के बाद लंका पर आक्रमण किया, तो उनके साथ लाखों की सेना थी, जिसमें वानर, रीछ और दूसरे कई जानवर शामिल थे। सुग्रीव के साथ-साथ रावण का छोटा भाई विभीषण भी उनके साथ काम कर रहा था। ये राम के कूटनीतिक गुण हैं... जिनकी कोई तुलना नहीं की जा सकती।
आज के दौर में पूरा देश VIP कल्चर से परेशान है। अपने आपको VIP समझने वालों को भी श्रीराम के आचरण से सीखना चाहिए। श्रीराम ने हमेशा अपने से कमज़ोर लोगों को अपनी बराबरी पर बिठाया। उन्हें सहर्ष स्वीकार किया। केवट के साथ उनका व्यवहार और सुग्रीव के साथ उनकी मित्रता इसका प्रमाण है।
श्रीराम के लिए छूआ-छूत, अमीर-गरीब, ऊंच-नीच जैसा कोई भेदभाव नहीं था। शबरी के जूठे बेरों को प्रेम से खाना, केवट को गले लगाना, वानर और भालुओं को प्रेम और स्नेह देकर उन्हें अपना बनाना - ये सब राम से सीखने वाली बातें हैं। लेकिन आज के दौर में हमारे देश में दलितों या पिछड़ों के कल्याण के लिए सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी होती है... राम जैसी इच्छाशक्ति और आचरण देखने को नहीं मिलता।
>AI के संदर्भ में श्री राम का विज़न अप्लाई करें तो ये सूत्र निकलेगा कि Algorithm में छूआ-छूत न हो। न जाति का भेद हो, न भाषा का, न अमीर-गरीब का। आज के AI systems में bias की जो समस्या है, उसका जवाब भी राम के आचरण यानी RamGPT में है।
दुनिया Large Language Models बना रही है। शायद ज़रूरत एक Large Maryada Model की है - जो सदियों पहले train हो चुका है। बस activate करना बाकी है... मशीनों में भी, और इंसानों में भी।
2016 / 2023[^1]
[^1]: ये लेख 2016 में लिखा गया था, लेकिन 2023 में मैंने इसका एक दूसरा संस्करण लिखा, जो Large Language Model की तर्ज़ पर Large Maryada Model की बात करता है और श्री राम के आचरण को RamGPT के रूप में परिभाषित करता है।