## नदी.. थके हुए शहर का तकिया
#SansarKaCCTV
एक नदी होती है तो शहर को सिर टिकाने का सहारा मिल जाता है
हम सब बिना नदी वाले सूखे शहर में रहते हैं
शहर की गर्दन दर्द करती है
उलटता.. पलटता.. करवटें बदलता है..रात भर
सूजी हुई आंखों के साथ सुबह होती है
नदी नाम की है, और थकान..राख बनकर प्रवाहित होती है