## Wound : रोशनदान #Poetry ![[Pub-Wound.webp]] ![[Pub-wound-is-roshandaan.webp]] *खरोंच लगते ही ख़ून बाहर आता है या रोशनी? क्या घावों में रोशनदान जैसा भी कुछ होता है?* >सरल से दिखने वाले इस सवाल का जवाब सूफ़ी शिक्षाओं में छिपा हुआ है। इसे देखिए, कविता पढ़िए... और दरवेश टाइप फ़ील कीजिए... और हाँ... गोल घूमने की ज़रूरत नहीं है। उसके बग़ैर भी ऊपरवाले से कनेक्शन हो जाता है।   खरोंच लगते ही, रोशनी छनकर अंदर आने लगती है जगमगाने लगता है तन और मन अंदर ही अंदर ये तजुर्बे की रोशनी है जो हर ज़ख़्म से मिल रही है हर बार आपके घाव... आपके रोशनदान बन जाते हैं ##### Context Note The poem draws on Sufi teaching, from Shams Tabrizi to Rumi. Every wound, in that tradition, is also a way for light to enter. Healing is not a closing but a small permanent opening. 2019-09-01