## The Evil Magnetism of Society
### रावण के साथ एक सेल्फी
#CCTV
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श्रीराम भारतीय कलाकेंद्र की नृत्यनाटिका राम को देखने गया तो अद्भुत प्रस्तुति के बाद एक अनोखा दृश्य दिखाई दिया। प्रस्तुति खत्म होते ही हर किसी में रावण के साथ एक फोटो खिंचवाने की ललक दिखाई दे रही थी।
त्रेता युग से कलियुग आते आते खलनायक की चमक बढ़ गई है, हर कोई इस चमक, इस दबंगई, इस शक्ति को अपने अंदर देखना चाहता है। राम बनने का धैर्य और साधना.. स्क्रीन टाइम वाले इस दौर में किसी के पास नहीं और जब समाज को ऐसे लक्ष्य मुश्किल लगते हैं तो वो उल्टी दिशा से काम करना शुरू करता है यानी रावण को मूल रूप में लेकर उसमें सकारात्मक बदलाव करना शुरू करता है...
भले ही लोग अपनी श्रद्धा के चलते इस बात को न कहें पर मुझे लगता है कि इस दौर में चुपचाप ऐसा हो रहा है। हर गुज़रती पीढ़ी के साथ रावण के प्रति गुस्सा कम हो रहा है। रावण महा ज्ञानी था लेकिन उसमें कुछ दोष थे... और हर साल इन दोषों पर अपना गुस्सा उतार कर हमारी परंपराएं अपने हाथ झाड़ लेती हैं... परंतु गौर से देखा जाए तो रावण और राम के बीच सिर्फ आदर्शों और कर्मों की क्वालिटी का फर्क है...
रावण के सॉफ्टवेयर में त्रुटियां हैं और इन त्रुटियों को दूर करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट की ज़रूरत है... और सरल शब्दों में कहें तो राम और रावण के बीच सिर्फ एक सॉफ्टवेयर अपडेट का फर्क है... और खलनायक से खल को हटाकर नायक बनाने की गुंजाइश है।
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##### Context Note
At a Dussehra dance-drama in Delhi, 2015, the audience ignored Ram and queued for selfies with Ravana. The observation: each passing generation softens its anger toward the villain. Perhaps the only difference between Ram and Ravana is a software update - bugs fixed, same power redirected.
2015-10-18