## Smoke of Past : अतीत की आग और धुआं #Poetry क्या बीता हुआ कल…वक़्त की परतों में दबता जाता है ? क्या वो कभी वापस नहीं आता ? या फिर वो धुएं की तरह मन में टहलता रहता है ? अलग-अलग आकार लेता, अलग-अलग रंग का धुआं समय के छोटे से छोटे टुकड़े पर, अपने पैरों के निशान छोड़ने वाला धुआं, मिटाया तो नहीं जा सकता ठीक उसी तरह जैसे जूते से रगड़कर बुझाई जा रही आग कभी पूरी तरह नही बुझती, कुछ बाकी रह जाता है, कभी चिंगारी, कभी राख, तो कभी धुएं की शक्ल में और पसरा रहता है बहुत देर तक माहौल में विलीन हो चुका ये धुआं खत्म तो नहीं हो सकता लेकिन अगर कमरे की खिड़की खोल दूं तो वक़्त की सुलगती हुई शाख से निकलते हुए धुएं की हैसियत काफी कम हो जाएगी   ##### Context Note Does yesterday get buried under the layers of time, never to return, or does it wander the mind like smoke, taking different shapes and colors? Like a fire stamped out under a shoe, it never fully dies; something always remains, a spark, some ash, some smoke. This smoke cannot end, but if I open the window of the room, its hold loosens a little. 2016-02-21