## Snippets of Love ### घरेलू प्रेम पत्र (क्रम संख्या - १,२,३,४,५...) #Poetry ![[Pub-Snippets-of-love.webp]] डाक विभाग बर्फ़ की सिल्ली की तरह जम गया है, नेटवर्क ने हड़ताल कर दी है, वक़्त के इस Offline टुकड़े में कुछ पुराने बिखरे हुए पत्र मिले हैं। सर्द मौसम में मन को तापने के काम आएँगे।   ### आवश्यकता मुझे तुम चाहिए होती हो, पर मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए होता   ### खौलता हुआ पानी दूध होता तो उबल चुका होता अब तक पानी है इसलिए आँखों में खौल रहा है वो उबलकर बाहर नहीं गिरता भाप बनकर उड़ जाता है क्योंकि प्यार की आंच ज़्यादा है   ### पाँच फ़ुट दो इंच कुछ तुम उड़ी-उड़ी सी हो कुछ मैं झुका-झुका सा हूँ इसलिए आज तुम्हारी ऊँचाई में कुछ इंच का इज़ाफ़ा हुआ है   ### तिजोरियाँ खर्च हो जाओ मुझमें इतनी बचत करके क्या करोगी कर लो प्रयत्न सारे अंतत: यादों की तिजोरियाँ भरोगी   ### अंगीठी गहरी तपिश अंगीठी वाले कोयले सी उस पर दमकता उनका ख्याल जिस्म-ओ-रूह को ठंड से वही तो बचाता है   ##### Context Note When the post office freezes and the network fails, some old letters keep their warmth. Five of them, found in a winter drawer. 2018-12-09