## Soil-mates
### किस मिट्टी के बने हो?
#Poetry
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बातचीत के दौरान अक्सर कहा जाता है - किस मिट्टी के बने हो... इसका जवाब हर किसी के लिए अलग अलग हो सकता है... फिर भी एक धागा है... जो सारे जवाबों को सिल सकता है। रेडियो को ट्यून करते हुए एक साथ दो frequencies को सेट करना संभव नहीं है... लेकिन संभव और असंभव भी एक ही मिट्टी से बने हुए हैं। सच्चाई की बारिश, ताप खाई मिट्टी को मुलायम कर देती है... और असंभव... संभव में मिल जाता है। जैसे सत्ता पक्ष और आंदोलनकारी मिल जाते हैं। एक दूसरे के खून के प्यासे दुश्मन, साथ बैठकर, खून के बजाए 'कुछ और' पीने लगते हैं। बहुत सारे जीते जागते इंसान हैं... आवृत्ति भी एक है... बस कभी कभी महसूस होती है... जब बारिश होती है।
तुम और मैं
एक ही मिट्टी से बने हैं...
जब भी बारिश होती है...
मुझसे और तुमसे एक जैसी ख़ुशबू आती है
बारिश हमें एक ही फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) पर ले आती है
##### Context Note
Rain has a way of revealing what we are made of.
When it touches the earth, the same scent rises from you and me.
For a moment, all distance dissolves, and we return to the same frequency.
2017-09-03