## रविवार: नियंत्रित आलस्य की अंगड़ाई
> यह निबंध
> जनवरी 2020 में लिखा गया था—
> जब रविवार सवाल नहीं,
> अनुभूति था।
>
> #Doorbeen
![[Pub-sunday-pause.webp|400]]
सूर्य की किरणों की शक्ति बढ़ गई है।
सूर्य उत्तरायण हुए हैं।
और असर ऐसा है कि
इन शब्दों के पीछे भी
धूप निकल आई है।
धुँध से छनकर आती हो तो भी
धूप गुनगुना कर देती है।
बहुत कुछ।
सुख तेज़ी से डाउनलोड होने लगते हैं
किरणों के साथ।
रविवार को सूर्य से ऐसी किरणें निकलती हैं
जो आपको आलसी बना देती हैं—
बहुत आलसी।
यह कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है।
यह रविवार को
सूर्य और छुट्टी का दिन मानने से
उपजा अनुभव है।
वैसे भी,
रविवार हमेशा से छुट्टी का दिन नहीं था।
कई पश्चिमी देशों में
सूर्य को समर्पित दिवस पर
ईश्वर की आराधना की जाती थी।
ख़ासतौर पर ईसाइयों के लिए
यह गिरिजाघर जाने का दिन था—
इसीलिए वहाँ छुट्टी रहती थी।
लेकिन भारत में
रविवार की छुट्टी नहीं होती थी।
ब्रिटिश शासन में तो भारतीयों को
सातों दिन काम करना पड़ता था।
---
इसी पृष्ठभूमि में
ज्योतिबा फुले के सत्यशोधक आंदोलन से जुड़े
कामगार नेता
नारायण मेघाजी लोखंडे ने
मज़दूरों के हक़ में आवाज़ उठाई।
उनका तर्क सीधा था—
भारत के मज़दूर
हफ्ते में सात दिन
अपने परिवार के लिए काम करते हैं,
लेकिन समाज के लिए
कुछ नहीं कर पाते।
अगर समाज की समस्याओं को सुलझाना है,
तो मज़दूरों को हफ्ते में एक दिन
ख़ुद के लिए चाहिए।
सन 1881 में
उन्होंने अंग्रेज़ों के सामने
इसका प्रस्ताव रखा।
यह प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया गया।
---
नारायण मेघाजी लोखंडे को
रविवार की छुट्टी के लिए
लगभग आठ वर्षों तक
संघर्ष करना पड़ा।
आख़िरकार
1889 के आसपास
रविवार की छुट्टी
व्यवहार में आने लगी—
हालाँकि सरकारों ने
इसका कोई औपचारिक एलान नहीं किया।
एक RTI के जवाब में
बाद में यह बात स्पष्ट हुई।
---
रविवार में ‘रवि’ निहित है—
यानी सूर्य।
यह सूर्य का दिन है।
और सूर्य की किरणों में
स्वास्थ्य के सूत्र हैं।
भारत की परंपराओं में मान्यता है कि
आयुर्वेद का निर्माण
पाँचवें वेद के रूप में हुआ
और आयुर्वेद को
सूर्यदेव के हाथों में सौंपा गया।
इसके बाद
आयुर्वेद की स्वतंत्र संहिता बनी,
ताकि स्वास्थ्य के सूत्र
जन–जन तक पहुँच सकें।
---
इस तरह
रविवार सिर्फ़
एक छुट्टी का दिन नहीं है
यह
सूर्य, श्रम, शरीर
और समाज के बीच चलती
एक बातचीत है।
और शायद इसी वजह से
रविवार कभी
पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होता—
वह धूप की तरह हमारे अंदर
कुछ न कुछ जगा देता है।
---
नियंत्रित आलस्य को लेकर एक पुराना सूत्र
[[Originals]] सेक्शन में दर्ज है—
नियंत्रित आलस्य = आभूषण
इस विचार की
एक समकालीन बेचैनी
दूरबीन के नये दृश्य में खुलती है—
[[Sunday|रविवार: वह दिन जब हम अपने आप से बचते हैं]]