## Tie : फंदा #Poetry ![[Pub-tie.webp]] मेरे दर्द में और किसी मज़दूर के दर्द में कोई फर्क नहीं है मेरे भी पैर कांपते हैं कुछ नया शुरू करते हुए हर रोज़ जीतने के लिए दौड़ते दौड़ते मैं भी लड़खड़ाता हूं मेरा चरमराया हुआ आत्मसम्मान तब भी मेरे साथ होता है जब मैं पूरी शिफ़त से बेच रहा होता हूं खुद को लेकिन मैं कुछ भी बाहर नहीं आने देता गर्दन के आसपास बंधी टाई मेरी उड़ान को रोक लेती है मेरी गर्दन झुकती नहीं... टूटती नहीं न जाने कहां से आत्मविश्वास की बिजली का एक खंबा मेरे अंदर आकर गड़ जाता है और टाई पहन कर मैं साहब हो जाता हूँ लेकिन जैसे ही दुनिया के रंगमंच से उतरकर बैठता हूं टाई ढीली करते ही जो सधा हुआ था वो उड़ने लगता है सुबह फिर वही खंबा, वही टाई ##### Context Note The white-collar worker and the day-labourer share more than the city admits. A tie is a small, civilised noose, a brace, a flag, a leash. It holds the spine of a working day. Loosen it and the costume falls away. Tomorrow morning, the same pole, the same knot. 2014-12-21