## आवाज़ आपकी... इस्तेमाल का अधिकार किसका?
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AI अगर किसी की आवाज़ की नक़ल कर ले, तो उससे ऐसी बात भी कहलवाई जा सकती है जो उस व्यक्ति ने कभी कही ही नहीं। आवाज़ कहीं कॉपी न हो जाए, यह AI के दौर का नया डर है। और इस डर से निपटने के लिए अब मशहूर लोग एक पुराने क़ानूनी हथियार की तरफ़ जा रहे हैं... ट्रेडमार्क।
### मेलोनी का ट्रेडमार्क आवेदन
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी आवाज़ की ख़ास रिकॉर्डिंग्स के लिए EU में ट्रेडमार्क का आवेदन किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आवेदन में चार-चार सेकंड की दो रिकॉर्डिंग हैं, जिनमें वे कहती हैं, "Io sono Giorgia Meloni", यानी "मैं जॉर्जिया मेलोनी हूँ।" आवेदन अभी प्रक्रिया में है, मंज़ूर नहीं हुआ।
दूसरे मशहूर लोग भी यही रास्ता अपना रहे हैं। अभिनेता मैथ्यू मैककॉनहे को अपनी मशहूर लाइन "Alright, alright, alright" की रिकॉर्डिंग पर अमेरिका में ट्रेडमार्क मिल चुका है। गायिका Taylor Swift की ओर से भी उनकी आवाज़ की ख़ास रिकॉर्डिंग्स के लिए आवेदन किए गए हैं।
पर यह सिर्फ़ ख़ास रिकॉर्डिंग्स की सुरक्षा का रास्ता है। इससे यह तय नहीं होता कि किसी की आवाज़ के हर संभव इस्तेमाल पर रोक लग जाएगी।
### आवाज़ में समानता होना, नक़ल साबित होना नहीं है
2024 का स्कारलेट जोहैनसन वाला विवाद याद कीजिए। उन्होंने कहा था कि OpenAI के सैम ऑल्टमैन का आवाज़ देने का प्रस्ताव ठुकराने के बाद भी ChatGPT की "Sky" आवाज़ उन्हें अपनी आवाज़ जैसी लगी। OpenAI ने कहा कि वह एक दूसरी अभिनेत्री की आवाज़ थी और जोहैनसन की नक़ल का कोई इरादा नहीं था। फिर भी कंपनी ने Sky का इस्तेमाल रोक दिया। यह आवाज़ की समानता और सहमति का विवाद था। आवाज़ की चोरी साबित नहीं हुई।
### हक़ीक़त मीटर
- **क्या आवाज़ का ट्रेडमार्क अतिरिक्त क़ानूनी सुरक्षा दे सकता है?**
- हाँ, मंज़ूरी और परिस्थितियों के हिसाब से।
- **क्या इससे नक़ली आवाज़ बनना बंद हो जाएगा?**
- नहीं।
**क़ानूनी ढाल मिल सकती है, पर आवाज़ की नक़ल पर तकनीकी ताला नहीं लगता।**
डीपफ़ेक को रोकने के लिए कुछ और सोचना होगा।
### इसी तकनीक की दूसरी तस्वीर भी रोचक है
6 अक्टूबर को कर्नाटक सरकार की संस्था KITS (Karnataka Innovation and Technology Society) और वॉइस AI कंपनी ElevenLabs ने एक समझौता किया। यह ElevenLabs की किसी भारतीय राज्य सरकार के साथ पहली साझेदारी है।
मक़सद ये है कि जिन लोगों की बोलने की क्षमता चली गई है, वे अपनी ही आवाज़ के कृत्रिम रूप की मदद से फिर संवाद कर सकें, और यह कन्नड़ में भी हो सके। पात्र लोगों की पहचान और अमल के लिए मैसूर के AIISH (All India Institute of Speech and Hearing) से बातचीत चल रही है। लाभार्थियों को लाइसेंस मुफ़्त और आजीवन मिलेगा, पर हर किसी को अपने आप नहीं मिलेगा। इसी समझौते में नक़ली आवाज़ के ख़तरों से बचाव का सुरक्षा ढाँचा बनाना भी शामिल है।
**जो तकनीक किसी की आवाज़ की नक़ल करके धोखा दे सकती है, वही आवाज़ खो चुके किसी व्यक्ति की बात दुनिया तक पहुँचा भी सकती है।**
ये इलाज नहीं है। शरीर की बोलने की क्षमता वापस नहीं आती, लेकिन अपनी बात कहने का रास्ता लौट सकता है।
### आपके काम की बात
परिचित आवाज़ में अचानक पैसे माँगने वाला फ़ोन आए, तो कॉल काटिए और अपने फ़ोन में सेव नंबर पर ख़ुद वापस फ़ोन करके पुष्टि कीजिए। आवाज़ कितनी भी अपनी लगे, आर्थिक माँग की जाँच ज़रूरी है।
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*यह जानकारी 7 अक्टूबर 2026 तक की है।*
*यह कहानी Tech Aajkal के एपिसोड 6 का हिस्सा थी। [पूरा एपिसोड देखिए](https://youtu.be/z_sU1U_nLMc?si=yEeS98bqv98ngMsa)। इसी एपिसोड से: [[Invisible Ink|AI से लिखवाया... तो क्या पकड़े जाएँगे?]] और [[Glass Witness|चश्मा आपका... पर मेरी प्राइवेसी का क्या?]]*
2026-10-07