## दीया बनो, रोशनी रचो : Worship of Light
#Poetry
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दीवाली पर आपके साथ कुछ रचनाएँ शेयर करना चाहता हूँ, इस पोस्ट में आगे जो वीडियो है वो एक पुरानी रचना पर आधारित है। इस विज़ुअल कविता को 2011 में संपूर्ण रूप से iPad पर ही तैयार किया था। इन रचनाओं को जब आप सिलसिलेवार तरीक़े से पढ़ेंगे तो दीवाली की काव्यात्मक पूजा संपन्न हो जाएगी। आपके लिए शुभकानाओं सहित
### सुनहरी रोशनी का तालाब : Golden Pond
हम-तुम रोशनी का दरिया हैं
अंधेरे को मिटाने का ज़रिया हैं
हर अंधेरा कह रहा है आगे बढ़ो
दीया बनो... रोशनी रचो...
### तैयारी : Preparation
दीये आँखों के, विचारों की दियासलाई
ज़रा सी आग लगाई, बहुत सारी रोशनी फैलाई
आँखें खोलो...
क्योंकि उजाले का एहसास, दृष्टि के साथ है
### दीप प्रज्वलन : Light up the Dark
वो ज़मीन से बना है
इसलिए ज़मीन से जुड़ा है
हर किसी का अपना है वो
घर नहीं देखता
हैसियत नहीं देखता
बस जलता जाता है
लुटता जाता है
साथ साथ बिखरती रहती है
अदम्य आभा
और रोशनी
उसकी मद्धिम लौ में
उम्मीद नज़र आती है
बहुत छोटा है वो
उसके बुझ जाने की
तमाम वजहें हैं आसपास
देखो फिर भी
लड़ता जाता है
जीतता जाता है
नन्हे से दीये में जाने कहां से
ये पहाड़ जैसा ऊंचा हौसला आ जाता है
### अपने ही अंदर प्रकाश का उत्सव : Soul Lights at Twilight
साँझ की तमाम रोशनियों को पी रहा हूँ,
उजाला घूँट घूँट मेरे गले से उतर रहा है,
अंधेरा बढ़ रहा है
और सारी रोशनी
मुझमें फैली हुई है
##### Context Note
Four pieces meant to be read in sequence, the way a Diwali puja is performed. The lamp is small, the dark is large, and somewhere along the way the festival turns inward.
2018-11-07